राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लॉकडाउन से आगे की रणनीति पर काम करना किया शुरू , उठाए यह कदम...

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए लागू लॉकडाउन से आगे की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया हैं। एक उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने इसके लिए संपूर्ण लॉकडाउन को रणबद्ध रूप से हटाने के लिए सुझाव देने तथा इससे प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के संबंध में सुझाव देने के उद्देश्य से दो टास्क फोर्स का गठन किया हैं। इसके लिए शुक्रवार को आदेश जारी किए गए। गहलोत ने लॉकडाउन हटाने के लिए महत्वपूर्ण उपाय सुझाने के लिये अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह राजीव स्वरूप की अध्यक्षता में 12 अधिकारियों और विशेषज्ञों की पहली टास्क फोर्स गठित की हैैं।

दूसरी टास्क फोर्स मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार एवं राजस्थान ट्रांसफोर्मेशन काउंसिल के उपाध्यक्ष अरविन्द मायाराम की अध्यक्षता में बनाई हैं। पहली टास्क फोर्स लॉकडाउन हटाने की स्थिति के बारे में जल्द से जल्द अपने सुझाव देगी, जिन्हें भारत सरकार को भेजा जाएगा। इसी प्रकार दूसरी टास्क फोर्स अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए रणनीति तैयार करेगी।

कोरोना लॉकडाउन : खेतों में सड़ रही सब्जियां, किसानों ने आत्महत्या की चेतावनी दी


कोरोना लॉकडाउन ने लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर किया लेकिन सबसे ज्यादा मार सब्जी उगाने वाले किसानों पर पड़ी है। बाजार में सब्जियां जा नहीं पा रही है और बिचौलिये कम दाम दे रहे हैं। यहां तक की सब्जियां खेतों में सड़ रही हैं। यूपी-बिहार, झारखंड और उत्तराखंड के अलावा एनसीआर सब जगह यही हाल है। बेहाल किसान सरकार से उम्मीद लगाए बैठे हैं। रांची में तो 10 गांव के दर्जनों किसानों ने सरकार को पत्र लिखकर आत्महत्या करने की चेतावनी तक दे डाली है।

झारखंड : गांव तक नहीं आ रहे व्यापारी, माल हो रहा बर्बाद
राज्य में बाजार नहीं मिलने के कारण सब्जी उत्पादक किसान तबाह हैं। 10 गांव के किसानों ने सहकारिता पदाधिकारी को पत्र लिखकर आत्महत्या की चेतावनी दी है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि व्यापारियों को गांव तक नहीं आने देने से उनका माल बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा है। पहले किसान अपने उत्पाद उड़ीसा, बंगाल और छत्तीसगढ़ भेजते थे। प्रतिदिन करीब 70 से 80 टन सब्जियां इन राज्यों में भेजी जाती थीं। लेकिन अभी किसानों को सब्जी लेकर दूसरे राज्यों में जाने की अनुमति नहीं है। साथ ही जो स्थानीय बाजार हैं  वे भी बंद कर दिए गए हैं। सहकारिता पदाधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि वे किसानों की समस्या का समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं।

बिहार : सब्जी उत्पादकों की टूटी कमर
बिहार में सब्जी उत्पादकों की कमर टूट गई है। खेतों में फसल तैयार है लेकिन सब्जियां बाहर नहीं जाने से खेतों में सूख जा रही हैं। स्थानीय स्तर पर खपत भी कम हो रही है। सारण के किसान ठाकुर भगत व लक्ष्मण साह कहते हैं- स्थानीय स्तर पर किसी तरह थोड़ी-बहुत खपत हो रही है। ऐसी स्थिति में किसानों को सीधे नुकसान हो रहा है। सत्यनारायण सिंह कहते हैं- सरकार को सब्जी उत्पादकों के लिए कुछ उपाय करना चाहिए ताकि हम बर्बादी से बचें। भोजपुर के स्थानीय मंडियों में सब्जियां आ रही हैं पर बाहर में सप्लाई चेन पर ब्रेक लग जाने से उचित कीमत नहीं मिल पा रही  है। यहां की सब्जियां रेफ्रिजरेटर वैन से राज्य के विभिन्न जिलों के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी भेजी जाती हैं। अभी ऐसा नहीं हो पा रहा है।

दिल्ली की मंडियों में नहीं जा रही मेरठ की सब्जी
मेरठ जिले में 22 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन पर सब्जी का उत्पादन होता है। लॉकडाउन होने के बाद जिले की मंडियों में किसान सब्जियां लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन खुदरा ग्राहकों पर रोक से सब्जी कम बिक रही। वहीं, दिल्ली के आजादपुर मंडी में सब्जियों का जाना बिल्कुल बंद है। इससे सब्जी उत्पादकों को नुकसान हो रहा है। सहारनपुर के डेढ़ सौ से ज्यादा गांव में लौकी, तोरी, कद्दू, टमाटर, खीरा, भिंडी, गोभी आदि की खेती होती है। देहरादून-हरिद्वार नजदीक होने के चलते ज्यादातर सब्जी इन्हीं शहरों में जाती है। बुलंदशहर, बागपत, मुजफ्फरनगर और बिजनौर में किसानों का यही हाल है।

उत्तराखंड : छोटे सब्जी उत्पादकों को ढुलाई में आ रही दिक्कत
देहरादून हरिद्वार के आसपास के कुछ किसानों को सब्जी निकालने के लिए मजदूर और ढोने के लिए वाहन नहीं मिल पा रहे। खेतों से पूरी सब्जियां नहीं उठ रही हैं। सहसपुर के मटर उत्पादक भूदेव मुताबिक मटर पर्याप्त है, लेकिन डिमांड कम है। दून मंडी इंस्पेक्टर अजय डबराल ने कहा- किसानों को सब्जी तुड़ाई के साथ ही ढुलान में मजदूर नहीं मिलने की शिकायतें मिल रही हैं। यूएसनगर में अधिकतर किसान जनपद की सीमा से लगे यूपी बॉर्डर से भी सब्जी लेकर आते हैं,लेकिन पास नहीं होने के कारण किसान सब्जी लेकर मंडी नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस कारण उनकी सब्जियां खराब हो रही है।

गाजियाबाद : फसल खतों में हो रही बर्बाद 
गाजियाबाद में खेतों में सब्जियों की फसल खराब हो रही है। सब्जी की कटाई और समय से बाजार तक नहीं पहुंचने से किसानों के सामने आर्थिक तंगी आ गई है। मोदीनगर तहसील क्षेत्र के किसानों का कहना है लॉकडाउन के कारण लोग ट्रैक्टर और मालवाहक वाहन लेकर आने को तैयार नहीं है। ऐसे में सब्जियों की काफी फसल बर्बाद हो रही है। किसानों को नुकसान हो रहा है। क्षेत्र में करीब 25 गांवों में छोटे-बड़े किसान आलू, बैगन, मिर्च, गोभी, लौकी उपजाते है। मोदीनगर, मेरठ और साहिबाबाद की मंडी में सब्जियों की आपूर्ति होती है। भोजपुर के किसान कृष्णपाल एवं किरनपाल का कहना है कि कोरोना बंदी में टैक्टर वाले आने को तैयार नहीं हैं।

वाराणसी : सड़कों पर फेंकना पड़ा लाखों का फल-सब्जी 
वाराणसी में स्थित पूर्वांचल की सबसे बड़ी फल और सब्जी मंडी पहड़िया में यह बेहाली साफ देखी जा सकती है। लाखों रुपये के फल रखे रखे सड़ने के कारण सड़कों पर फेंकना पड़ रहा है। कई फल औऱ सब्जी तो मवेशियों के पेट भरने लायक भी नहीं रह गए हैं। यहां से माल न सिर्फ पूर्वांचल के जिलों में जाता है बल्कि बिहार बंगाल से लेकर असम तक के कारोबारी यहां आकर माल खरीदते रहे हैं। इन्हीं व्यापारियों के भरोसे विभिन्न राज्यों से फल और सब्जी ट्रकों में भरकर यहां आता रहा है। शुक्रवार को मण्डी में एक ट्रक संतरा व एक ट्रक नीबू की आवक हुई। लेकिन खरीदार नहीं पहुंचे। मण्डी में तीन डीसीएम अनानास पहले से पड़ा था। इसकी बिक्री नहीं होने से माल पूरी तरह पककर सड़ गए। अन्य सामान को बचाने के लिए सड़े अनानास को सड़क पर फेंकना मजबूरी बन गया। कारोबारियो के अनुसार लगभग सात लाख रुपये का माल खराब हो गया है।

लखनऊ : नहीं बिकी तो जानवरों को खिला दी सब्जियां 
बीते महीने ओले-बारिश से फसल आधी रह गई फिर लॉकडाउन ने मंडियों के रास्ते बंद कर दिए।  गोरखपुर, बनारस, कानपुर और लखनऊ के किसानों के लिए यह लॉकडाउन मुसीबत का सबब बन गया है। बरेली तरफ के किसान जरूर कुछ अपनी सब्जियां उत्तराखंड भेज पा रहे हैं। किसान औने-पौने दामों पर आढ़तियों को सब्जियां बेचने पर मजबूर हैं। राजपुर गांव के किसान अदालत गौड़ ने खेत में उगाए बैगन और पालक काटकर जानवरों को खिला दिए। गौड़ के साथ तमाम किसानों के खेतों में कच्चा केला, मटर, भिंडी, लौकी आदि तैयार हैं लेकिन मंडी तक वे पहुंचा नहीं सकते। देवरिया में भी रामपुर, कमधेनवा और कोन्हवलिया के सब्जी किसान पालक और गोभी काटकर पशुओं को खिला रहे हैं। खामपार के भोला ने कहा दो एकड़ में तैयार लौकी, गोभी और हरी मिर्च खरीदने एक हफ्ते से कोई व्यापारी नहीं आया। इन किसानों का कहना है-पिछले 10 दिन में शायद ही कोई किसान होगा, जिसने बाजार जाकर सब्जी बेचने की कोशिश की हो और पिटा न हो।

आगरा में सस्ते दाम पर बेचने को मजबूर किसान
आगरा में 100 से ज्यादा गांवों में लौकी, शिमला मिर्च, धनिया, टमाटर, बैंगन, काशीफल, हरी मिर्च, मैथी, पालक आदि सब्जियां होती हैं। लेकिन इस समय माल की सप्लाई नहीं हो पा रही। लोकल बिक्री पर ही निर्भरता। माल सस्ता बेचना पड़ रहा। जो लौकी आठ से दस रुपये में दिल्ली जाती है। उसे लोकल में पांच रुपये में बेच कर खत्म करना पड़ रहा। इसी प्रकार शिमला मिर्च के भी 20-30 रुपये किलो की जगह काफी कम दाम मिल रहे।

सरकारी कार्यालयों में हस्तनिर्मित मास्क वितरित किये गए।

अंता। जिला  बारां रिपोटर ब्रह्मानंद गुर्जर प्रतिहार

बारां जिले अंता  में नीलकंठ कॉलोनी निवासी समाजसेवी  बबलू मालव द्वारा कोरोना वायरस के मामले को लेकर  अनूठी पहल करते हुये सरकारी कार्यालयों में सौ - सौ मास्क वितरित किये गए है। मालव की इस पहल की  तहसीलदार नवनंद सिंह सहित कर्मचारियों द्वारा प्रशंसा की जा रही है।
कोरोना वायरस से बचाव को लेकर मालव द्वारा  पुलिस स्टेशन,नगर पालिका,पंचायत समिति ,उपखण्ड कार्यालय तथा तहसील कार्योलय के समस्त कर्मचारियों को हस्तनिर्मित मास्क वितरित किये गए है ।
बबलू मालव ने बताया कि  मुश्किल की इस घड़ी में  अनेक कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डाल कर कोरोना जैसी भयंकर बीमारी से मुकाबला कर रहे है ऐसे में इनकी सुरक्षा को देखते हुये  सभी कार्योलयों  में मास्क वितरित किये गये ओर आगे भी जितना हो सकेगा  मदद को तैयार रहूंगा ।

भगवान राम के जन्मदिन पर कोरोना के बीच लोगों में खुशी का माहौल



अंता। घरों के बाहर जलाए जा रहे हैं दीपक, दीपावली की सी रोशनी में जगमगा रहा है गांव व मन्दिर कहीं 5 तो कहीं 11 दीपक जलाए जा रहे हैं। मन्दिरो में भगवान राम से कोरोना पर जीत की मांगी दुआ।


लोक डाउन का रखा पूरा ख्याल

@ ब्रह्मा नंद गुर्जर

पीएम मोदी का चीनी प्रधानमंत्री को पत्र, कोविड-19 से निपटने के लिए वैश्विक प्रतिक्रिया को अपनाने की जरूरत


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और चीन के बीच अच्छे संबंधों को दोनों देशों, क्षेत्र एवं दुनिया की शांति एवं समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा कि कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए सही अर्थो में वैश्विक प्रतिक्रिया को अपनाने की आवश्यकता है ।
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर चीनी प्रधानमंत्री ली क्विंग को भेजे संदेश में यह बात कही। इस अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पत्र लिखकर दोनों देशों के मजबूत संबंधों को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'कोविड-19 महामारी हमें इस बात की याद दिलाती है कि दुनिया एक दूसरे से परस्पर किस प्रकार से जुड़ी हुई है और इसलिए इससे (कोरोना वायरस) मुकाबला करने के लिए सही अर्थो में वैश्विक प्रतिक्रिया को अपनाने की आवश्यकता है।' मोदी ने कहा कि भारत और चीन दो प्राचीन सभ्यताएं हैं, जिनके बीच सदियों से परस्पर लाभकारी आदान-प्रदान का लंबा इतिहास रहा है।

उन्होंने कहा कि हम दो बड़े विकासशील देश और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएँ हैं और आज तेजी से वैश्विक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मोदी ने कहा कि भारत और चीन के बीच अच्छे संबंध न केवल दोनों देशों के लिए उपयुक्त हैं बल्कि हमारे क्षेत्र और विश्व की शांति, स्थिरता और समृद्धि के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह दोनों देशों के संबंधों को और अधिक गहरा और मजबूत बनाने के लिए चीनी प्रधानमंत्री के साथ काम करने को लेकर आशान्वित हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को लिखे पत्र में चीन की सरकार और वहां के लोगों के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त की।



कौड़ी के भाव मिलेगा तेल, दुनिया में रखने तक की जगह नहीं


पूरी दुनिया में कोरोना की वजह से लॉकडाउन है। लॉकडाउन के कारण पेट्रोल-डीजल की डिमांड काफी घट गई है। दूसरी तरफ सऊदी अरब और रूस के बीच बाजार पर अधिग्रहण को लेकर प्राइस वार जारी है और दोनों देश उत्पादन घटाने का नाम नहीं ले रहे हैं। घटते डिमांड और बढ़ती सप्लाई के कारण ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि दुनिया में तेल रखने की जगह नहीं है। कच्चा तेल पहले ही 17 सालों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुका है। अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले कुछ महीने में यह कौड़ी के भाव मिलेगा।

पूरे विश्व में लॉकडाउन से मांग में भारी गिरावट
वर्तमान परिस्थिति को गहराई से समझने की कोशिश करते हैं। पूरे यूरोप, एशिया, अमेरिका समेत कई देशों में लॉकडाउन जारी है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट, ट्रेन और हवाई जहाज का संचालन बंद है। लोग अपने घरों में आइसोलेटेड हैं। यह परिस्थिति पिछले तीन-चार सप्ताह या उससे भी ज्यादा से है। पेट्रोल-डीजल की डिमांड में गिरावट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत में आम दिनों के मुकाबले इसकी मांग 10-20 फीसदी तक रह गई है।
तेल उत्पादन को लेकर OPEC और गैर-ओपक देशों के बीच तीन सालों का समझौता आज खत्म हो गया। सऊदी ने साफ-साफ कहा है कि आज से वह तेल निर्यात बढ़ाकर रेकॉर्ड 1.06 करोड़ बैरल प्रतिदिन करेगा। ऑयल कंपनियों का कहना है कि मांग में आई गिरावट के कारण हर बैरल को रिफाइन करने पर उनका नुकसान बढ़ता जा रहा है। अगले कुछ सप्ताह में उनका ऑयल स्टोर भी भर जाएगा। ये हालात पूरी दुनिया के रिफाइनरी के हैं।

WTI प्रोड्यूसर्स के लिए चुनौती और बड़ी
सबसे बड़ी चुनौती लैंड लॉक्ड क्रूड (WTI) प्रोड्यूसर्स के सामने है। गोल्डमैन शैक्स का कहना है कि पूरी दुनिया में 1 अरब बैरल तेल के स्टोर की क्षमता है लेकिन वहां तक पहुंच पाना मुश्किल है। डिमांड के अभाव में WTI प्रोड्यूसर्स को उत्पादित तेल को स्टोर तक पहुंचाने के लिए अपने जेब से खर्च करने होंगे। ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम पहले से ही बुरी तरह प्रभावित है। यहीं से नेगेटिव प्राइसिंग की शुरुआत होने वाली है।
मार्च के महीने में आधी हुई कीमत 
कीमत पर नजर डालें तो आज ब्रेंट क्रूड इंटरनैशनल मार्केट में 25 डॉलर के करीब ट्रेड कर रहा है। 30 मार्च को एक समय इसकी कीमत 21 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी। 2 मार्च को कच्चा तेल करीब 51.90 डॉलर था। वहीं WTI क्रूड की बात करें तो आज यह 20 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा है। 2 मार्च को इसकी कीमत 46.75 डॉलर प्रति बैरल थी।