लाखों के कर्ज तले दबे किसान (हितेन्द्र चौधरी की कलम से)

दिन-रात जी तोड़ मेहनत करने वाले धरतीपुत्र करोड़ों के कर्ज तले दबे हुए हैं। खेती पर बढ़ती लागत व पर्यावरण असंतुलन की मार से उनकी दशा में सुधार नहीं हो रहा। हालत यह है कि बैंक से कर्ज लेने के बाद किसान समय पर उसकी अदायगी नहीं कर पा रहे। इससे उन्हें बैंक की ओर से लगने वाली पेनल्टी भी भुगतनी पड़ती है। किसानों को साहूकारों के चंगुल से छुड़ाने के लिए बैंक की अच्छी खासी योजनाएं भीअसरदार साबित नहीं हो पा रही।