बिक्री घटने से पेट्रोल पंप मालिकों का घाटा बढ़ा, सरकार और तेल कंपनियों से मदद की मांग


कोरोना के कारण जारी लॉकडाउन की वजह से पेट्रोल-डीजल की डिमांड में 30 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट आई है जिसके कारण पूरे देश में पेट्रोल पंप संचालकों को भारी नुकसान हो रहा है। ऐसे में पेट्रोल पंप मालिकों ने सरकार से वित्तीय मदद देने की अपील की है। पेट्रोल पंप ऑपरेटरों ने शुक्रवार को कहा कि लॉकडाउन की वजह से उनकी बिक्री मात्र दस प्रतिशत रह गई है।

तेल की बिक्री में भारी गिरावट
ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स असोसिएशन (AIPDA) ने अपने कारोबार को चलाने के लिए पेट्रोलियम कंपनियों से वित्तीय राहत पैकेज देने की मांग की है। AIPDA का दावा है कि 64,000 पेट्रोल पंप ऑपरेटर उसके सदस्य हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों पेट्रोलियम कंपनियों के प्रमुखों को लिखे पत्र में एआईपीडीए के अध्यक्ष अजय बंसल ने कहा कि कोरोना वायरस संकट की वजह से लागू लॉकडाउन के दौरान अपने राष्ट्रीय कर्तव्य को निभाते हुये पेट्रोल पंप परिचालक अपना पेट्रोल पंप चला रहे हैं। लेकिन ज्यादातर वाहन सड़क से बाहर हैं जिससे ईंधन की बिक्री में भारी गिरावट आई है।

बिक्री मात्र 10 प्रतिशत रह गई है
उन्होंने कहा कि प्रति खुदरा पंप पर बिक्री का राष्ट्रीय औसत 170 किलोलीटर प्रति माह से घटकर मात्र 15 किलोलीटर रह गया है। बंसल ने कहा कि हमारा कारोबार पूरी तरह बिक्री पर निर्भर है। हमें प्रति लीटर ईंधन की बिक्री पर मार्जिन मिलता है। इसका मतलब है कि हम जितना कम बेचेंगे उतना ही अधिक हमें नुकसान होगा। उन्होंने पत्र में कहा है कि 170 किलोलीटर की बिक्री पर मासिक आधार पर डीलर मार्जिन 27,500 रुपये बैठता है।

डीलरों को भारी नुकसान 
उन्होंने कहा कि बेशक हम कम कर्मचारियों के साथ परिचालन कर रहे हैं लेकिन पेट्रोल पंपों को कई निश्चित शुल्क मसलन मीटर शुल्क, कर्मचारियों का वेतन, बैंक शुल्क, स्टॉम्पिंग शुल्क आदि देना पड़ता है। बिक्री घटने के बाद भी इसमें कटौती नहीं हुई। इस वजह से डीलरों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

वित्तीय पैकेज की मांग
उन्होंने पेट्रोल पंपों के लिए वित्तीय पैकेज की मांग करते हुए कहा कि डीलरों ने सरकार की सलाह पर कर्मचारियों को मार्च का वेतन दिया है। हम आगे भी ऐसा जारी रखना चाहते हैं। लेकिन ऐसा हम कब तक कर पाएंगे। बिक्री सामान्य होने तक हमें भारी नुकसान होगा।