कौड़ी के भाव मिलेगा तेल, दुनिया में रखने तक की जगह नहीं


पूरी दुनिया में कोरोना की वजह से लॉकडाउन है। लॉकडाउन के कारण पेट्रोल-डीजल की डिमांड काफी घट गई है। दूसरी तरफ सऊदी अरब और रूस के बीच बाजार पर अधिग्रहण को लेकर प्राइस वार जारी है और दोनों देश उत्पादन घटाने का नाम नहीं ले रहे हैं। घटते डिमांड और बढ़ती सप्लाई के कारण ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि दुनिया में तेल रखने की जगह नहीं है। कच्चा तेल पहले ही 17 सालों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुका है। अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले कुछ महीने में यह कौड़ी के भाव मिलेगा।

पूरे विश्व में लॉकडाउन से मांग में भारी गिरावट
वर्तमान परिस्थिति को गहराई से समझने की कोशिश करते हैं। पूरे यूरोप, एशिया, अमेरिका समेत कई देशों में लॉकडाउन जारी है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट, ट्रेन और हवाई जहाज का संचालन बंद है। लोग अपने घरों में आइसोलेटेड हैं। यह परिस्थिति पिछले तीन-चार सप्ताह या उससे भी ज्यादा से है। पेट्रोल-डीजल की डिमांड में गिरावट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत में आम दिनों के मुकाबले इसकी मांग 10-20 फीसदी तक रह गई है।
तेल उत्पादन को लेकर OPEC और गैर-ओपक देशों के बीच तीन सालों का समझौता आज खत्म हो गया। सऊदी ने साफ-साफ कहा है कि आज से वह तेल निर्यात बढ़ाकर रेकॉर्ड 1.06 करोड़ बैरल प्रतिदिन करेगा। ऑयल कंपनियों का कहना है कि मांग में आई गिरावट के कारण हर बैरल को रिफाइन करने पर उनका नुकसान बढ़ता जा रहा है। अगले कुछ सप्ताह में उनका ऑयल स्टोर भी भर जाएगा। ये हालात पूरी दुनिया के रिफाइनरी के हैं।

WTI प्रोड्यूसर्स के लिए चुनौती और बड़ी
सबसे बड़ी चुनौती लैंड लॉक्ड क्रूड (WTI) प्रोड्यूसर्स के सामने है। गोल्डमैन शैक्स का कहना है कि पूरी दुनिया में 1 अरब बैरल तेल के स्टोर की क्षमता है लेकिन वहां तक पहुंच पाना मुश्किल है। डिमांड के अभाव में WTI प्रोड्यूसर्स को उत्पादित तेल को स्टोर तक पहुंचाने के लिए अपने जेब से खर्च करने होंगे। ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम पहले से ही बुरी तरह प्रभावित है। यहीं से नेगेटिव प्राइसिंग की शुरुआत होने वाली है।
मार्च के महीने में आधी हुई कीमत 
कीमत पर नजर डालें तो आज ब्रेंट क्रूड इंटरनैशनल मार्केट में 25 डॉलर के करीब ट्रेड कर रहा है। 30 मार्च को एक समय इसकी कीमत 21 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी। 2 मार्च को कच्चा तेल करीब 51.90 डॉलर था। वहीं WTI क्रूड की बात करें तो आज यह 20 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा है। 2 मार्च को इसकी कीमत 46.75 डॉलर प्रति बैरल थी।